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शुक्ल यजुर्वेद (काण्व) 23.27

शा॒र॒देन॑ ऋ॒तुना॑ दे॒वा ए॑कविᳪश ऋ॒भव॑ स्तु॒ताः ।
वै॒रा॒जेन॑ श्रि॒या श्रिय॑ᳪ ह॒विरिन्द्रे॒ वयो॑ दधुः ॥४॥

पूरा अध्याय