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शुक्ल यजुर्वेद (काण्व) 22.74

इन्द्रा या॑हि॒ तूतु॑जान॒ उप॒ ब्रह्मा॑णि हरिवः । सु॒ते द॑धिष्व न॒श्चनः॑ ॥१०॥

पूरा अध्याय