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शुक्ल यजुर्वेद (काण्व) 22.59

ता नास॑त्या सु॒पेश॑सा॒ हिर॑ण्यवर्तनी॒ नरा॑ । सर॑स्वती ह॒विष्म॒तीन्द्र॒ कर्म॑सु नोऽवत ॥८॥

पूरा अध्याय