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शुक्ल यजुर्वेद (काण्व) 22.49

अ॒श्विना॑ भेष॒जं मधु॑ भेष॒जं नः॒ सर॑स्वती । इन्द्रे॒ त्वष्टा॒ यशः॒ श्रिय॑ᳪ रू॒पᳪरू॑पमधुः सु॒ते ॥१०॥

पूरा अध्याय