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शुक्ल यजुर्वेद (काण्व) 22.47

पा॒तं नो॑ अश्विना॒ दिवा॑ पा॒हि नक्त॑ᳪ सरस्वति ।
दैव्या॑ होतारा भिषजा पा॒तामिन्द्र॒ᳪ सचा॑ सु॒ते ॥८॥

पूरा अध्याय