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शुक्ल यजुर्वेद (काण्व) 22.42

इन्द्रा॒येन्दु॒ᳪ सर॑स्वती॒ नरा॒शᳪसे॑न न॒ग्नहु॑म् ।
अधा॑ताम॒श्विना॒ मधु॑ भेष॒जं भि॒षजा॑ सु॒ते ॥३॥

पूरा अध्याय