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शुक्ल यजुर्वेद (काण्व) 22.35

त्रा॒तार॒मिन्द्र॑मवि॒तार॒मिन्द्र॒ᳪ हवे॑हवे सु॒हव॒ᳪ शूर॒मिन्द्र॑म् ।
ह्वया॑मि श॒क्रं पु॑रुहू॒तमिन्द्र॑ᳪ स्व॒स्ति नो॑ म॒घवा॑ धा॒त्विन्द्रः॑ ॥४॥

पूरा अध्याय