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शुक्ल यजुर्वेद (काण्व) 21.56

बर्हि॑षदः पितर ऊ॒त्य॒र्वागि॒मा वो॑ ह॒व्या च॑कृमा जु॒षध्व॑म् ।
त आ ग॒ताव॑सा॒ शन्त॑मे॒नाथा॑ नः॒ शं योर॑र॒पो द॑धात ॥५॥

पूरा अध्याय