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शुक्ल यजुर्वेद (काण्व) 21.49

ये स॑मा॒नाः सम॑नसो जी॒वा जी॒वेषु॑ माम॒काः ।
तेषा॒ᳪ श्रीर्मयि॑ कल्पताम॒स्मिँल्लो॒के शतᳪ समाः॑ ॥१७॥

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