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शुक्ल यजुर्वेद (काण्व) 21.43

प॒वित्रे॑ण पुनीहि मा शु॒क्रेण॑ देव॒ दीद्य॑त् । अग्ने॒ क्रत्वा॒ क्रतू॒ᳪरनु॑ ॥११॥

पूरा अध्याय