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शुक्ल यजुर्वेद (काण्व) 21.30

इळा॑भिर्भ॒क्षाना॑प्नोति सूक्तवा॒केना॒शिषः॑ ।
शं॒युना॑ पत्नीसंया॒जान्त्स॑मिष्टय॒जुषा॑ स॒ᳪस्थाम् ॥१८॥

पूरा अध्याय