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शुक्ल यजुर्वेद (काण्व) 21.19

ह॒वि॒र्धानं॒ यद॒श्विनाग्नी॑ध्रं॒ यत्सर॑स्वती ।
इन्द्रा॑यै॒न्द्रᳪ सद॑स्कृ॒तं प॑त्नी॒शालं॒ गार्ह॑पत्यः ॥७॥

पूरा अध्याय