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शुक्ल यजुर्वेद (काण्व) 20.37

(४) ३६
वार्त्र॑हत्याय॒ शव॑से पृतना॒षाह्या॑य च । इन्द्र॒ त्वाव॑र्तयामसि ॥१॥

पूरा अध्याय