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शुक्ल यजुर्वेद (काण्व) 20.27

इ॒ष्टो अ॒ग्निराहु॑तः पिपर्तु न इ॒ष्टᳪ ह॒विः । स्व॒गेदं दे॒वेभ्यो॒ नमः॑ ॥७॥

पूरा अध्याय