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शुक्ल यजुर्वेद (काण्व) 2.58

५७ (१०७)
उदायु॑षा स्वा॒युषोत्पर्जन्य॑स्य॒ धाम॑भिः। उद॑स्थाम॒मृताँ॒ अनु ॥५॥

पूरा अध्याय