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शुक्ल यजुर्वेद (काण्व) 2.42

वे॒षो॑ऽस्युपवे॒षो द्वि॑ष॒तो ग्री॒वा उप॑वेविढ्ढि । वेशां॑ अग्ने सुभग धारये॒ह ॥७॥

पूरा अध्याय