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शुक्ल यजुर्वेद (काण्व) 2.26

प्रा॒णा॒पा॒नौ मे॑ पाहि समानव्या॒नौ मे॑ पाह्युदानव्या॒नौ मे॑ पाहि।
ऊर्ग॒स्यूर्जं॒ मयि॑ धे॒ह्यक्षि॑तिरसि॒ मा मे॑ क्षेष्ठा अ॒मुत्रा॒मुष्मिं॑ल्लो॒क इ॒ह च॑ ॥८॥

पूरा अध्याय