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शुक्ल यजुर्वेद (काण्व) 2.23

आद॑दे॒ऽग्नेष्ट्वा॒स्ये॑न॒ प्राश्ना॑मि॒ बृह॒स्पते॒र्मुखे॑न । या अ॒प्स्व॒न्तर्दे॒वता॒स्ता इ॒दᳪ श॑मयन्तु ॥५॥

पूरा अध्याय