ग्रंथशुक्ल यजुर्वेद (काण्व)अध्याय 1818.61शुक्ल यजुर्वेद (काण्व) 18.61दे॒व॒हूर्य॒ज्ञ आ च॑ वक्षत्सुम्न॒हूर्य॒ज्ञ आ च॑ वक्षत् । यक्ष॑द॒ग्निर्दे॒वो दे॒वाँ३ आ च॑ वक्षत् ॥१३॥पिछलाअगलापूरा अध्याय