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शुक्ल यजुर्वेद (काण्व) 18.54

समि॑द्धे अ॒ग्ना अधि॑ मामहा॒न उ॒क्थप॑त्र॒ ईड्यो॑ गृभी॒तः ।
त॒प्तं घ॒र्मं प॑रि॒गृह्या॑यजन्तो॒र्जा यद्य॒ज्ञमय॑जन्त दे॒वाः ॥६॥

पूरा अध्याय