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शुक्ल यजुर्वेद (काण्व) 17.60

ये प॒थां प॑थिर॒क्षिण॑ ऐलबृ॒दा आ॑यु॒र्युधः॑ । तेषा॑ᳪ सहस्रयोज॒नेऽव॒ धन्वा॑नि तन्मसि ॥१४॥

पूरा अध्याय