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शुक्ल यजुर्वेद (काण्व) 17.54

असं॑ख्याता स॒हस्रा॑णि॒ ये रु॒द्रा अधि॒ भूम्या॑म् । तेषाँ॑ सहस्रयोज॒नेऽव॒ धन्वा॑नि तन्मसि ॥८॥

पूरा अध्याय