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शुक्ल यजुर्वेद (काण्व) 17.49

या ते॑ रुद्र शि॒वा त॒नूः शि॒वा वि॒श्वाहा॑ भेष॒जी । शि॒वा रु॒तस्य॑ भेष॒जी तया॑ नो मृळ जी॒वसे॑ ॥३॥

पूरा अध्याय