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शुक्ल यजुर्वेद (काण्व) 17.42

(६) ४१
नमः॒ पार्या॑य चावा॒र्या॑य च॒ नमः॑ प्र॒तर॑णाय चो॒त्तर॑णाय च ।
नम॒स्तीर्थ्या॑य च॒ कूल्या॑य च॒ नमः॒ शष्प्या॑य च॒ फेन्या॑य च ॥१॥

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