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शुक्ल यजुर्वेद (काण्व) 17.2

या ते॑ रुद्र शि॒वा त॒नूरघो॒रापा॑पकाशिनी । तया॑ नस्त॒न्वा॒ शन्त॑मया॒ गिरि॑शन्ता॒भिचा॑कशीहि ॥२॥

पूरा अध्याय