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शुक्ल यजुर्वेद (काण्व) 16.58

स इ॑धा॒नो वसु॑ष्क॒विर॒ग्निरी॒डेन्यो॑ गि॒रा । रे॒वद॒स्मभ्यं॑ पुर्वणीक दीदिहि ॥१८॥

पूरा अध्याय