ग्रंथशुक्ल यजुर्वेद (काण्व)अध्याय 1616.51शुक्ल यजुर्वेद (काण्व) 16.51सᳪस॒मिद्यु॑वसे वृष॒न्नग्ने॒ विश्वा॑न्य॒र्य आ । इ॒ळस्प॒दे समि॑ध्यसे॒ स नो॒ वसू॒न्या भ॑र ॥११॥पिछलाअगलापूरा अध्याय