Utshovऐप डाउनलोड करें

शुक्ल यजुर्वेद (काण्व) 16.28

अधि॑पत्न्यसि बृह॒ती दिग्विश्वे॑ ते दे॒वा अधि॑पतयः । बृह॒स्पति॑र्हेती॒नां प्र॑तिध॒र्ता ॥१३॥

पूरा अध्याय