ग्रंथशुक्ल यजुर्वेद (काण्व)अध्याय 1414.54शुक्ल यजुर्वेद (काण्व) 14.54त्वं य॑विष्ठ दा॒शुषो॒ नॄᳪ पा॑हि शृणु॒धी गिरः॑ । रक्षा॑ तो॒कमु॒त त्मना॑ ॥६॥पिछलाअगलापूरा अध्याय