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शुक्ल यजुर्वेद (काण्व) 14.37

इ॒षे रा॒ये र॑मस्व॒ सह॑से द्यु॒म्न ऊ॒र्जे अप॑त्याय ।
स॒म्राळ॑सि स्व॒राळ॑सि सारस्वतौ॒ त्वोत्सौ॒ प्राव॑ताम् ॥९॥

पूरा अध्याय