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शुक्ल यजुर्वेद (काण्व) 13.97

मा वो॑ रिषत् खनि॒ता यस्मै॑ चा॒हं खना॑मि वः । द्वि॒पच्चतु॑ष्पद॒स्माक॒ᳪ सर्व॑मस्त्वनातु॒रम् ॥२२॥

पूरा अध्याय