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शुक्ल यजुर्वेद (काण्व) 13.74

विमु॑च्यध्वमघ्न्या देवयाना॒ अग॑न्म॒ तम॑सस्पा॒रम॒स्य । ज्योति॑रापाम ॥१२॥

पूरा अध्याय