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शुक्ल यजुर्वेद (काण्व) 13.70

शु॒नᳪ सु फाला॒ विकृ॑षन्तु॒ भूमि॑ᳪ शु॒नं की॒नाशा॑ अ॒भिय॑न्तु वा॒हैः ।
शुना॑सीरा ह॒विषा॒ तोश॑माना सुपिप्प॒ला ओष॑धीः कर्तम॒स्मे ॥८॥

पूरा अध्याय