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शुक्ल यजुर्वेद (काण्व) 13.61

भव॑तं नः॒ सम॑नसौ॒ सचे॑तसा अरे॒पसौ॑ ।
मा य॒ज्ञᳪ हि॑ᳪसिष्टं॒ मा य॒ज्ञप॑तिं जातवेदसौ शि॒वौ भ॑वतम॒द्य नः॑ ॥१६॥

पूरा अध्याय