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शुक्ल यजुर्वेद (काण्व) 12.56

सᳪसृ॑ष्टां॒ वसु॑भी रुद्रै॒र्धीरैः॑ कर्म॒ण्यां॒ मृद॑म् ।
हस्ता॑भ्यां मृ॒द्वीं कृ॒त्वा सि॑नीवा॒ली कृ॑णोतु॒ ताम् ॥६॥

पूरा अध्याय