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शुक्ल यजुर्वेद (काण्व) 12.14

योगे॑योगे त॒वस्त॑रं॒ वाजे॑वाजे हवामहे । सखा॑य॒ इन्द्र॑मू॒तये॑ ॥३॥

पूरा अध्याय