ग्रंथशुक्ल यजुर्वेद (काण्व)अध्याय 1111.41शुक्ल यजुर्वेद (काण्व) 11.41प्रियं॑कर॒ श्रेय॑स्कर॒ भूय॑स्कर । इन्द्र॑स्य॒ वज्रो॑ऽसि॒ तेन॑ मे रध्य ॥५॥पिछलाअगलापूरा अध्याय