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शुक्ल यजुर्वेद (काण्व) 10.15

बृह॑स्पते॒ वाजं॑ जय॒ बृह॒स्पत॑ये॒ वाचं॑ वदत । बृह॒स्पतिं॒ वाजं॑ जापयत ॥२॥

पूरा अध्याय