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शुक्ल यजुर्वेद (काण्व) 10.13

वाजि॑नो वाजजितो॒ वाज॑ᳪ सरि॒ष्यन्तः॑ । बृह॒स्पते॑र्भा॒गमव॑जिघ्रत ॥७॥

पूरा अध्याय