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वाल्मीकि रामायण 97.4

सेयं लोकभयाद्ब्रह्मन्नपापेत्यभिजानता ।
परित्यक्ता मया सीता तद्भावन्क्षन्तुमर्हति ।। ७.९७.४ ॥

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