ग्रंथवाल्मीकि रामायणउत्तरकाण्डसर्ग 9797.16वाल्मीकि रामायण 97.16मनसा कर्मणा वाचा यथा रामं समर्चये । तथा मे माधवी देवी विवरं दातुमर्हति ।। ७.९७.१६ ॥पिछलाअगलापूरा अध्याय