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वाल्मीकि रामायण 93.1

वर्तमाने तथाभूते यज्ञे च परमाद्भुते ।
सशिष्य आजगामाशु वाल्मीकिर्मुनिपुङ्गवः ।। ७.९३.१ ॥

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