ग्रंथवाल्मीकि रामायणउत्तरकाण्डसर्ग 9090.16वाल्मीकि रामायण 90.16अथ यज्ञे समाप्ते तु प्रीतः परमया मुदा । उमापतिर्द्विजान्सर्वानुवाच इलसन्निधौ ।। ७.९०.१६ ॥पिछलाअगलापूरा अध्याय