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वाल्मीकि रामायण 9.41

तं दृष्ट्वा कैकसी तत्र ज्वलन्तमिव तेजसा ।
आगम्य राक्षसी तत्र दशग्रीवमुवाच ह ।। ७.९.४१ ॥

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