Utshovऐप डाउनलोड करें

वाल्मीकि रामायण 9.38

कुम्भकर्णः प्रमत्तस्तु महर्षीन्धर्मवत्सलान् ।
त्रैलोक्यं भक्षयन्नित्यासन्तुष्टो विचचार ह ।। ७.९.३८ ॥

पूरा अध्याय