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वाल्मीकि रामायण 9.2

नीलजीमूतसङ्काशस्तप्तकाञ्चनकुण्डलः ।
कन्यां दुहितरं गृह्य विना पद्ममिव श्रियम् ।। ७.९.२ ॥

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