ग्रंथवाल्मीकि रामायणउत्तरकाण्डसर्ग 8989.6वाल्मीकि रामायण 89.6अहं कामचरी सौम्य तवास्मि वशवर्तिनी । प्रशाधि मां सोमसुत यथेच्छसि तथा कुरु ।। ७.८९.६ ॥पिछलाअगलापूरा अध्याय