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वाल्मीकि रामायण 89.25

बुधस्तु पुरुषीभूतं स वै संवत्सरान्तरम् ।
कथाभी रमयामास धर्मयुक्ताभिरात्मवान् ।। ७.८९.२५ ।।

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