ग्रंथवाल्मीकि रामायणउत्तरकाण्डसर्ग 8989.14वाल्मीकि रामायण 89.14समाश्वसिहि भद्रं ते निर्भयो विगतज्वरः । फलमूलाशनो वीर निवसेह यथासुखम् ।। ७.८९.१४ ॥पिछलाअगलापूरा अध्याय