ग्रंथवाल्मीकि रामायणउत्तरकाण्डसर्ग 8787.8वाल्मीकि रामायण 87.8स प्रचक्रे महाबाहुर्मृगयां रुचिरे वने । चैत्रे मनोरमे मासि सभृत्यबलवाहनः ।। ७.८७.८ ॥पिछलाअगलापूरा अध्याय